लगाया गया आरोप बेबुनियाद

बहाली प्रक्रिया में फर्जीवाड़ा के आरोप से घिरे कुलसचिव ने सभी आरोप को भ्रामक व बेबुनियाद बताया। बुधवार को इस संबंध में बीएन मंडल विवि के कुलसचिव नरेंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि छात्र संगठन किसी के बहकावे में आकर इस तरह का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट करते हुए कहा कि वे सामान्य कोटि से ही प्राध्यापक के पद पर बहाल हुए हैं। परीक्षा व इंटरव्यू में भी सामान्य कोटि से शामिल हुए। उन्होंने इस संबंध में कागजात दिखाते हुए कहा कि विवि द्वारा जारी अधिसूचना में उनके नाम के आगे केटेगरी में सामान्य के जगह पर बीसी वन लिखा गया। इसमें सुधार को लेकर उन्होंने बिहार राज्य विवि सर्विस कमीशन को पत्र लिखा। बिहार राज्य विवि सर्विस कमीशन ने कहा कि यह गलती विवि प्रशासन की है इसे विवि के कुलसचिव से सुधार करवाएं। इसके बाद 1999 में उन्होंने बीएनएमयू के कुलसचिव इस कोटि में सुधार को लेकर पत्र लिखा। उन्होंने कहा कि उनके सभी शैक्षणिक कागजात में उनका नाम नरेंद्र जंगबहादूर था, जिसे 1995 एफिडेविट के द्वारा बदलकर श्रीवास्तव किया गया। उन्होंने कहा कि आरक्षित कोटे के लिए मैंने कभी दावा ही नहीं किया तो मेरा सेलेक्शन कैसे आरक्षित कोटे में हो सकता है। कुलसचिव ने कहा कि जब-जब उन्हें विवि का कोई महत्वपूर्ण पद दिया गया है। कुछ लोग विवि द्वारा जारी पुराने नोटिफिकेशन को दिखाकर बदनाम करने की साजिश की जा रही है। कुलसचिव ने कहा कि मेरी इच्छा है कि विवि नियम परिनियम के आधार पर चलें। इसके सारे कार्य नियमानुसार किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में अपने अधिवक्ता से विचार-विमर्श उचित कानूनी कार्रवाई करेंगे। जरूरत पड़ने पर इस तरह के भ्रामक व बेबुनियाद आरोप लगाने वाले लोग पर मानहानि का मुकदमा भी कर सकते हैं।

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